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बुधवार, 8 सितंबर 2010

...आज जब तुम पास नहीं हो

आज फिर मन कर रहा है बूंदों के साथ नाचें,
आज फिर मन कर रहा है दूर तक पैदल चला जाए,
आज फिर मन कर रहा है रोते हुए बच्चे को बहलाया जाए,
आज फिर मन कर रहा है कहीं दूर हो आया जाए,
आज फिर मन कर रहा है तुमसे खूब दिल्लगी की जाए,
...आज जब तुम पास नहीं हो,
खूब मन कर रहा है तुम्हारे पास होने को...

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