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मंगलवार, 27 जुलाई 2010

हो सके तो माफ कर देना

वह पहला बर्थडे था तुम्हारा जब मैं नहीं आ सका
जब तुम पहली बार हाईकोर्ट गए
अपना पहला बड़ा केस लड़ने
मैं नहीं आ सका
जब तुमने अपना पहला बड़ा केस जीता
खुशियों में मैं शामिल नहीं हो सका
जब तुम्हारी शादी हुई
और तुम फेरों तक तकते रहे मेरी राह
तब भी मैं नहीं आ सका
जब तुम्हारे छोटे भाई निलेश की शादी हुई कसरावद से
और मैं इंदौर आई बरात में भी शामिल न हो सका
जब तुम्हारे यहां पहली संतान प्यारी बिटिया हुई
तब भी मैं इस खुशी में शरीक नहीं हो सका
मैं हर बार आना चाहता था
क्योंकि ये तमाम अवसर मेरे लिए भी उतने ही
महत्वपूर्ण थे जितने कि तुम्हारे लिए
मैं आज भी आना चाहता हूं तुम्हारे पास
पर अब जबकि मैं अपराधबोध से भरा हूं
और जानता हूं कि मेरे ये कृत्य
माफी के लायक नहीं हैं
फिर भी हो सके तो मुझे माफ कर देना बृजेश....

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